17th September in Kolkata

17th September… यानी हर साल की तरह आज भी विश्वकर्मा पूजा की धूम… हर छोटे बड़े कारखाने में पूजा और पार्टी का संगम… मालिक और मज़दूर दोनों का साथ साथ lunch लेना… चार factories में मुझे भी जाना पड़ा… बेशक बतौर guest… अब क्या करें मेरी अपनी तो कोई फैक्ट्री है नहीं… और ना ही दादा जी या नाना जी की ओर से विरासत में मिली है… खैर! कहीं non -veg तो कहीं veg खाने का इंतज़ाम था… पर आजकल मैं ज़रा संभल कर खाता हूँ क्यूंकि मेरे seniors का कहना है की टीवी पर अगर काम करना है तो slim - trim दिखना बहुत ज़रूरी है… खाने का शौक़ीन हूँ … देखे कब तक कण्ट्रोल कर पाता हूँ।
वैसे आज कलकतिया आसमान पर पतंगे भी खूब दिखने को मिली… मैं जब भी पतंगों को उड़ते हुए देखता हूँ ऊपरवाले से यही दुआ करता हूँ कि इन्हें आपस में लड़ने देना… एक दूसरे को काटने देना… भले ही ये लड़े और एक दूसरे को काटे… ये अच्छा लगता है… क्यूंकि पतंगे खून तो नहीं बहाते ना ?… इन्हें कोई दंगाई तो नहीं कहता… अब पतंगे china से आए या पाकिस्तान से या फिर अपने देश के हो… नीले आसमान पर एक साथ उड़ते हुए बहुत अच्छे दिखते हैं।
आज मौसम दगा दे गया… रंगीन पतंगों को गीला कर गया… एक पल तो लगा कि काश मेरे पास बन्दूक होती, तो मैं बरखा रानी को गोलियों से भून देता। विश्वकर्मा पूजा के मौके पर Taxi … Bus… Tram… Auto Rickshaw… यहाँ तक कि रिक्शे को भी फूल मालाओं से सजा धजा देखा… चौंका तो मैं तब… जब कोलकाता Police Van को साफ़ सुथरा देखा… उस पर गेंदा फूल का माला देखा… फिलहाल आज के लिए इतना ही… जय बोलो विश्वकर्मा देव की जय …

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