KOLKATA 2012 - Auto Taxi Love Story


AUTO IN KOLKATA



TAXI IN KOLKATA
कोलकाता शहर है बड़ा अलबेला... आजकल ऑटो रिक्शा और टैक्सी वालों की वजह से हर राह पर हो रहा है झमेला.... बात कहाँ से शुरू करूँ... ऑटो वालों के खिलाफ न आम जनता कुछ कह सकती न और ना ही यहाँ की पुलिस कुछ कर सकती है... मैं बहुत कोशिश करता हूँ सोचने की... आखिर ऐसी कौन सी वजह हो सकती है ... जिस वजह से पुलिस भी ऑटो वालो से दस कदम की दूरी बनाये रखती है| 



क्या ये ऑटो वाले जम कर राजनीति करते हैं या फिर कुछ और... कई लोगों का कहना है कि ऑटो वाले सही जगह पर इतने पैसे पहुंचाते हैं कि इनके खिलाफ कोई भी कुछ नहीं कर सकता... अब सवाल ये उठता है कि ये सही जगह है क्या? 

खैर! आम जनता के किस्मत में जो लिखा है वो हो कर ही रहेगा... मुझे तो लगता है कि अगर लोग भी एकजुट होकर ये फैसला ले कि वो ऑटो का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो शायद बात बने... मगर क्या ये संभव है... क्या हमारी ज़िन्दगी बिना ऑटो के चल सकती है? 

सोचना आपको है ... सोचना सब को है | जब भी सोचता हूँ कि टैक्सी को आवाज़ दूं... तो पहले दिल मेरा ये सिग्नल देता है कि क्या ये टैक्सी वाला भी कहीं भी जाने के लिए ना कर देगा... टैक्सी वालों के मामले में भी अपनी पुलिस लाचार और बेबस दिखाई पड़ती है... समझ में नहीं आता कि ये वर्दी वाले भी टैक्सी और ऑटो वालों से क्यूँ डरते हैं? 

ऑटो और टैक्सी को कुछ और नाम देना चाहिए... क्या कहे हम इन्हें पुकारते वक़्त... भगवान... हीरो... मालिक... या प्रधान मंत्री... डरता हूँ प्रधान मंत्री कहने से... कहीं ये भी चुप नहीं रहने लगे... वर्ना जाना होगा बेलतला तो ये लेकर चले जायेंगे आमतला... उसके बाद तो और भी झमेला आप इनसे कुछ भी कहते रहे ये चुप ही रहेंगे... यानी एक बात तो तै कर लेते हैं... कि इन्हें हम जो भी कह कर पुकारे मगर सड़क का प्रधान मंत्री कह कर नहीं बुलाएँगे| अब अपनी बात यहीं पर ख़तम करते हैं इसी दुआ के साथ कि ऑटो और टैक्सी वालों को दिल दे दे दाता |        

2 टिप्‍पणियां

noshir ने कहा…

Dear Rakeshji its true auto and taxi has become a menace these days. the fact that police and administration doesn't get tough on them suggests that there is a great cover for these people by the politicians. the issue goes far,just observe the time they take to change their union to a winning party after polls. they are sheltered by the politicians. poor transport infrastructure had made us dependent on them. probably little do these poor fellows realize that they are themselves making so many enemies in a democratic society. God give them sense and sensibility......AMEN

RJ RAKESH ने कहा…

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